paida hue hain KHaak se ya aasmaañ se ham | पैदा हुए हैं ख़ाक से या आसमाँ से हम

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

पैदा हुए हैं ख़ाक से या आसमाँ से हम
आए हैं इस जहाँ में भला किस जहाँ से हम

डर है जुनून–ए–मर्ग में कर लें न ख़ुद–कुशी
बेज़ार हो चुके हैं बहुत जिस्म–ओ–जाँ से हम

कब तक खुलेगा उन पे तक़ाज़ा-ए-माह-ओ-साल
कब तक नजात पाएँगे दर्द–ए–निहाँ से हम

लाज़िम तेरा सवाल पर ऐ हम–सफ़र न पूछ
लाए हैं तुझ को ढूँढ के वापस कहाँ से हम

हम को जहाँ में अहल-ए-त'अय्युश से क्या ग़रज़
रखते त'अल्लुक़ात हैं आशुफ़्तगाँ से हम

किस तौर रह सकेगा ये सालिम ज़रा बता
दिल एक कोह–ए–बर्फ़ सा आतिश–ब–जाँ से हम

हालत हमारी देख के लगता है ये ‘अभी’
बच कर निकल सकेंगे न क़ैद-ए-गिराँ से हम

  - Abhishek Bhadauria 'Abhi'

Dar Shayari

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