चाहता है वो न मुझ सेे सामना हो
दरमियाँ अपने हमेशा फ़ासला हो
अजनबी नंबर से फोटो भेजती हूँ
क्या पता मुझ को उसे फिर देखना हो
बंद मेरे दिल के दर बस होने को हैं
लौट आओ जल्द जिस को लौटना हो
और कोई मैं खिलौना भेज दूँगी
जो सिवा दिल के तुम्हें कुछ तोड़ना हो
अब नहीं होगी वज़ाहत मुझ से शायद
ख़ामुशी चुन लेती हूँ जब बोलना हो
यार मैं भी थक गई हूँ इंतिहा से
ऐ मुक़द्दर दे अभी जो भोगना हो
— Bhoomi Srivastava















