नज़्म: रुख़्सती
ये सजावट ये ज़ेवर ये मुस्कुराना तेरा
कितना ख़ूब-सूरत है मुझ से दूर जाना तेरा
तेरे सर पर चुनरी है, हैं ख़ुशियाँ आगे तेरे
अब तोड़ दे मुझ से जुड़े वो कच्चे धागे तेरे
वो तस्वीर जो तकिए के नीचे छुपा रखी है
वो घड़ी जो कहीं किसी कोने में दबा रखी है
अब नहीं है तुझ पर कोई भी अधिकार मेरा
सो क्यूँ हो तुझे क़ुबूल कोई भी श्रृंगार मेरा
तू देख तेरी ये नई राह कितनी हसीन होगी
तारों से आसमान फूलों से सजी ज़मीन होगी
तुझे जान से ज़्यादा चाहने वाले नए अपने होंगे
तेरी नई ज़िंदगी के सच सारे तेरे सपने होंगे
इन ख़्वाबों-ख़यालों की दुनिया के बीच में मगर
पुराने जज़्बात, यादें पुरानी आएँ मिलने अगर
तो तू मुझ से अपनी हर शिकायत याद करना
ख़त्म हो चुकी हमारी वो हिकायत याद करना
थोड़ा मुस्कुरा देना या दो आँसू ही बहाना तू
और याद करने से पहले, मुझे भूल जाना तू















