किसी समय में मुझे एक लड़की भाती थी
मुझे वो प्यार से मिस्टर बिज़ी बुलाती थी
मैं उस पे शा'इरी लिखकर उसे सुनाता था
कि रात में वो कहानी मुझे सुनाती थी
हर एक ग़लती पे मैं उस को सॉरी कहता था
बगै़र ग़लती के वो मुझ से रूठ जाती थी
कि एक दिन सभी कुछ ठीक हो ही जाएगा
ये बात कह के मेरा हौसला बढाती थी
ये बेंच देख रहे हो ना ये उसी की है
ये क्लास देख रहे हो यहाँ वो आती थी
वो लड़की भी किसी लड़के से इश्क़ करती थी
मगर ये बात अमित मुझ से वो छुपाती थी
— Daqiiq Jabaalii















