पत्थरों के बुतों में धड़कनें लाएँ कैसे
बेवफ़ाओं को वफ़ा करना सिखाएँ कैसे
वो समझते नहीं हैं सिर्फ़ मज़ा लेते हैं
क़ल्ब की बात रफ़ीकों से बताएँ कैसे
नींद का क्या है दवाओं से भी ले आएँगे
मसअला ख़्वाब का है ख़्वाब सजाएँ कैसे
घर हो महबूब हो या मुल्क हो या माँ की कोख
आख़िरश लड़कियों को इनसे बचाएँ कैसे
वो अलग दौर था जब इश्क़ किया जाता था
अब बुझानी है हवस तन की बुझाएँ कैसे
— Daqiiq Jabaalii















