इश्क़ का बस यही तो मज़ा हैंहिज्र के बा'द मिलती क़ज़ा हैंमौत से ख़ौफ थोड़ी हैं, आएअब तो बे-इश्क़ ये ही रज़ा हैं— Deep kamal panecha