
क़लह ख़ामोश करने घर की मन के काले जाएँगे
मुझे डस लेंगे लेकिन फिर भी बिच्छू पाले जाएँगे
मिरे दुश्मन जो आ तो मैं गया ना अपनी करने पे
जनाज़े को भी तेरे शानों के पड़ लाले जाएँगे
— Deep kamal panecha
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