चंद लम्हें साथ में गुज़ारे कोई हम को इस दर्द से उबारे कोईहै लाज़िम तेरी आँखों की शर्मिंदगी भीमेरा नाम जब महफ़िल में पुकारे कोई— Kuldeep Nagar