आसान समझा जाना भी नुक़सान है
नुक़सान को सह पाना क्या आसान है
इक अजनबी ने तोड़ा है दिल मेरा और
इक अजनबी का जोड़ कर एहसान है
तलवार दो धारी हो तो अच्छी नहीं
मैंने निभाया इक वचन जो शान है
ख़ुद को ग़लत उसने नहीं माना कभी
औरों को भी अच्छे से देता मान है
हर रोज़ ये सुनता था सब सेे इक अनाथ
होता नहीं जिसका कोई भगवान है
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