सबने उसे हर पल बताया था ख़राब
ये 'इश्क़ में उसके सिवा लगता ख़राब
बस 'इश्क़ में पागल हुई है वो मेरे
कोई न कोई 'इश्क़ में होता ख़राब
पहले इबादत करनी उसकी 'इश्क़ में
कहना ग़लत फिर उस
में था क्या क्या ख़राब
ये दोगलेपन का सहारा अच्छा हैं
मर्ज़ी से हो जाता हूँ अच्छा या ख़राब
यानी नहीं है दोगलापन ये कहा
अच्छा भी होता है धरम थोड़ा ख़राब
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