मुझको वो इतना बे-ज़ार कर देता है
मेरा जीना भी दुश्वार कर देता है
जिस तरह हँस के मिलता है हर एक से
मुझको भी वो मिलन-सार कर देता है
वो जो मुमकिन नहीं है कहानी से भी
काम वो एक किरदार कर देता है
घर हो जाते हैं मिसमार इस से मगर
इक ग़लत दाँव बेदार कर देता है
'इश्क़ कुछ भी नहीं इक मरज़ के सिवा
अच्छे अच्छों को बीमार कर देता है
बोती थी पहले नफ़रत सियासत, मगर
अब ये भी काम अख़बार कर देता है
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