साथ ले कर वो अगर आइने चलते
इक हक़ीकत सब को ही दिखलाते चलते
और तो होगी नहीं हम से ये चाहत
थक गए हैं पैर भी अब चलते चलते
रूठे थे पर एक दूजे को मनाया
और फिर कितने ये इन के झगड़े चलते
रोने की हम को सुहूलत भी नहीं है
अच्छा होता साथ कुछ दीवाने चलते
— Dileep Kumar















