तुम को तो बस ये दिखाना होता है
हम को रिश्ता भी निभाना होता है
जिस तक़ल्लुफ़ से तू मुझ से मिलता है
वो फ़क़त मिलना-मिलाना होता है
ज़िंदगी ख़ुद नाचने लग जाती है
हम को बस इक गीत गाना होता है
मिलने की तय्यारी करनी पड़ती है
और ख़ुद को भी मनाना होता है
तुम को तो महफ़िल सजानी होती है
हम को वापस घर भी जाना होता है
— Dileep Kumar















