दिल अगर शाद हो गया होता
ग़म भी आज़ाद हो गया होता
शा'इरी मैं अगर नहीं करता
मैं भी आबाद हो गया होता
एक भी शे'र जो मैं कह पाता
तो तुम्हें याद हो गया होता
मेरा ग़म साथ है वगरना तो
शे'र बर्बाद हो गया होता
शुक्रिया आप मिल गए वरना
यश तो बर्बाद हो गया होता
— Yash Sharma















