"सुंदर लड़की"
वो जो सुंदर लड़की थी
दिल के अंदर रहती थी
जब वो खुलकर हँसती थी
मेरी धड़कन बढ़ती थी
उस के नैना नीले थे
थोड़े थोड़े गीले थे
उन पर उस की पलकें थीं
वो थोड़े शर्मीले थे
वो सीने से लगती थी
दिल में राहत जगती थी
मैं ने चिट्ठी पढ़ ली थी
वो चाहत में पगली थी
दिन भर बातें करती थी
फिर वो आहें भरती थी
वो तो दिल की चाहत थी
उस से मुझ को राहत थी
हर दिन उस से मिलता था
लड़की मेरी आदत थी
जब जब चाहत बढ़ती थी
उस को उल्फत चढ़ती थी
फिर महफ़िल में जा कर वो
मेरी ग़ज़लें पढ़ती थी
दिल के अंदर रहती थी
वो जो सुंदर लड़की थी
— Yash Sharma















