Divu
Divu
Ghazal

हाल बेहतर मिरा मुझ को ही बताने वाला

दूर रहता है कहीं साथ निभाने वाला

दश्त से कम नहीं ये भीड़ ज़रा देखो तो
फिर भी इस शहर में तन्हा है कमाने वाला

धूल कमरे की बयाँ कर रही है मेरा हाल
अब कोई आता नहीं हाथ मिलाने वाला

मिल गए लोग किनारे पे बहुत से अपने
बीच दरिया था नहीं कोई बचाने वाला

बेबसी पर मिरी कुछ लोग को हँसते देखा
पास मेरे नहीं अब कुछ भी गँवाने वाला

— Divu

More by Divu

Other ghazal from the same pen

See all from Divu →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling