हाल बेहतर मिरा मुझ को ही बताने वाला
दूर रहता है कहीं साथ निभाने वाला
दश्त से कम नहीं ये भीड़ ज़रा देखो तो
फिर भी इस शहर में तन्हा है कमाने वाला
धूल कमरे की बयाँ कर रही है मेरा हाल
अब कोई आता नहीं हाथ मिलाने वाला
मिल गए लोग किनारे पे बहुत से अपने
बीच दरिया था नहीं कोई बचाने वाला
बेबसी पर मिरी कुछ लोग को हँसते देखा
पास मेरे नहीं अब कुछ भी गँवाने वाला
— Divu















