मिली सोहबत में जो तेरे वो मैं तक़दीर चूमूँगा
रखूँगा सर तिरे आगे तेरी शमशीर चूमूँगा
ये तू ने किस तरह क़ाबू रखा है मुझ पे आ कर देख
रखेगा क़ैद में अपने तो मैं ज़ंजीर चूमूँगा
तेरे हर ख़्वाब की ता'बीर मुश्किल से कटी बेशक
तेरी आँखों में देखूँगा वही ता'बीर चूमूँगा
ज़माना कहता है ज़ालिम तुझे ये सोच उन की है
मुझे पूछे जो कोई मैं तेरी तस्वीर चूमूँगा
नहीं फेंका है मैं ने आज तक कोई भी ख़त तेरा
दिखेगी मौत जब आगे तो मैं तहरीर चूमूँगा
— Divu















