उसे आज ऐसे सँवारा गया है
फ़लक से क़मर को उतारा गया है
वो गुज़रा जहाँ से वहाँ हाल पूछो
तरसती निगाहें नज़ारा गया है
नहीं हो रहा है कोई शे'र कामिल
समझ रात कैसे गुज़ारा गया है
उसे कह दे कोई वो पर्दा ही कर ले
ख़बर तक नहीं कौन मारा गया है
रखी एक महफ़िल पढ़ी उस की ता'रीफ़
मुझे कह के शाइ'र पुकारा गया है
— Divu















