अभी तो देखो सुब्ह-ओ-शाम भी करना पड़ेगा

अगरचे नाम माँगा, काम भी करना पड़ेगा

मशक्कत ही नहीं करती है सारे काम साक़ी
सो हाए राम हाए राम भी करना पड़ेगा

केई चुप-चाप सुन ले बात तो फिर क्या ग़रज़ है
मगर अब काम है, कोहराम भी करना पड़ेगा

किसी पत्थर के टुकड़े हैं मगर हाँ क़ीमती हैं
अब ऐसे दिन इन्हें नीलाम भी करना पड़ेगा

हमारा नाम तुम को देखना है पहली सफ़ में
तो देखो पहले ये बदनाम भी करना पड़ेगा

— Divyansh "Dard" Akbarabadi

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Deedar Shayari

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