jo mere rone bhar se mar jaa.e | जो मेरे रोने भर से मर जाए

  - Shadab Asghar

जो मेरे रोने भर से मर जाए
'इश्क़ ऐसा नहीं तो घर जाए

मेरी नज़रो से जो उतर जाए
फ़र्क़ नई पड़ता फिर किधर जाए

मेरी धड़कन का बोझ कम होगा
तू यहाँ से अगर गुज़र जाए

आज वो मुझ सेे मिलने आया है
वक़्त से कह दो के ठहर जाए

आशिकी की ये आख़िरी हद है
बन्दा कर जाए या तो मर जाये

उसके चेहरे में है चमक ऐसी
चाँद से बोल अपने घर जाए

मैं उसे सच बताने वाला था
डर भी था के कहीं मुकर जाए

  - Shadab Asghar

Waqt Shayari

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