मेरी आँखों में अश्क लाए बग़ैरयाद आई है तेरी आए बग़ैरमोड़ ऐसा था जिसमें दोनों कोसाथ चलना था साथ आए बग़ैरहै मुहब्बत में हिज्र तय लेकिनकौन मानेगा आज़माए बग़ैरकाश मेरा भी ज़ेहन पढ़ ले कोईकितना बेचैन हूँ बताए बग़ैरउस ने छीनी थी फूल की रंगतडोली उट्ठेगी मुस्कुराए बग़ैर— Furkan Ansari