कहाँ मगन हो महल से बाहर तो आओ मोहन
हमें सुदामा समझ गले से लगाओ मोहन
किसी तरह से कुछ ऐसा जादू चलाओ मोहन
तुम्हारी चाहत में सब को मीरा बनाओ मोहन
हमारी दुनिया उजड़ रही है जो रफ़्ता रफ़्ता
तुम्हारे मन में जो चल रहा है बताओ मोहन
तुम्हारी अपनी बनाई इतनी हसीन दुनिया
सिसक रही है बचाओ मोहन बचाओ मोहन
वो चाक जिस पे धरी है दुनिया तुम्हारे आगे
सभी का अच्छा हो चाक ऐसे घुमाओ मोहन
फँसे हुए हैं तमाम माया व मोह में हम
हमें भी अपनी विशाल आभा दिखाओ मोहन
— Gaurav Singh















