इश्क़ में फेर-बदल आता है
जब कोई एक बदल जाता है
आप की सारी कहानी सच्ची
पर मुझें झूठ समझ आता है
रोने लग जाते है तेरे आशिक़
तू तरस फिर भी नहीं खाता है
वो है कैसा न बताओ मुझकों
उस का सुनके ही जी घबराता है
ये कहानी है उसी लड़के की
आज जो नींद में चिल्लाता है
हो गई हैं वही हालत मेरी
जिस
में बच कोई नहीं पाता है
आँख कहती हैं कि काजल डालो
दिल लहू लेने चला जाता है
ग़म भुलाना भी है इक फ़न लेकिन
ये हुनर सब को कहाँ आता है
— Govind kumar















