आँख खुली तो सपना भूल गए
प्यास बुझी तो दरिया भूल गए
सारा कमरा बिखेर डाला है
रख कर कहीं पे दुनिया भूल गए
कल शब हम को जो याद आया था
हम तो उस को कब का भूल गए
हम को रक़्स सिखाने आते हैं
जो ख़ुद सीधा चलना भूल गए
हम से न पूछ कुछ भी नामाबर
हम ख़ुद घर का रस्ता भूल गए
बातों में उलझाया साक़ी ने
कल शब हम तो पीना भूल गए
— Gulfam Ajmeri















