इश्क़ में ज़ख़्म भी तो देगा कोई
उम्र भर इनको फिर भरेगा कोई
देख ले मेरा हाल जो दुनिया
फिर मुहब्बत नहीं करेगा कोई
तू चला जाएगा किसी के साथ
और तुझे ढूॅंढता फिरेगा कोई
अब मैं अपने भी घर नहीं जाता
तो मिरी राह क्यूँ तकेगा कोई
मेरे सब रास्ते ग़लत निकले
तो मिरे साथ क्यूँ चलेगा कोई
अब मिरी लाश फेंक दो साहब
ज़ुर्म ऐसा नहीं करेगा कोई
और तब क्या कहेगा तू 'गुलफ़ाम'
उस के बारे में पूछ लेगा कोई
— Gulfam Ajmeri















