कोई सहरा कोई जंगल कोई दरिया पड़ता
ढूँढ़ते तुझ को तिरी खोज में चलना पड़ता
काश इक रोज़ तू जो घर को बुलाती अपने
काश उस रोज़ हमें फिर कहीं छिपना पड़ता
हिज्र आसान नहीं है मिरी जाँ हम से पूछ
दूसरा गर कोई होता उसे मरना पड़ता
जल्दबाज़ी में ख़रीदा है ये जो दिल 'गुलफ़ाम'
और बाज़ार में टकराते तो सस्ता पड़ता
— Gulfam Ajmeri















