साथ मेरे जो हादसा हुआ है

कौन सा पहली मर्तबा हुआ है

होता है सब के साथ इश्क़ में जो
हक़ में मेरे वो फ़ैसला हुआ है

वो मोहब्बत की बातें करती है अब
साथ उस के भी कुछ बुरा हुआ है

रूह का रास्ता बदन नहीं बस
तजरबा मैं ने ये किया हुआ है

लड़ता है जंग जो अकेले कभी
उस के ही हिस्से काफ़िला हुआ है

एक लड़की ने फिर से चाहा मुझे
दोस्त मतलब कि मसअला हुआ है

मेरा बस एक मशवरा है उसे
भूल जाओ कि राब्ता हुआ है

— Kumar gyaneshwar

More by Kumar gyaneshwar

Other ghazal from the same pen

See all from Kumar gyaneshwar →

Ishq Shayari Collection

Shers of ishq shayari collection.

All Ishq Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling