इतनी भी ज़्यादा हम सेे गुज़ारिश न होगी दोस्त
या'नी अकेले वस्ल की कोशिश न होगी दोस्त
हर साल की तरह ही सताएगा साल ये
सूखा पड़ेगा देखना बारिश न होगी दोस्त
दफ़्तर में सबकी भर्ती सिफ़ारिश पे होगी और
तुम देखना कि अपनी सिफ़ारिश न होगी दोस्त
लोगों में ढूँढ़ते हो ख़ुदा के अमल को तुम
आमाल ऐसे होंगे तो बख़्शिश न होगी दोस्त
झूठे क़सीदे पढ़के कमाने को इल्तिफ़ात
ज़ालिम हुकूमतों की सताइश न होगी दोस्त
— Hasan Raqim















