kuchh kaha aur kuchh ankaha rah gaya | कुछ कहा और कुछ अनकहा रह गया

  - Hasan Raqim

कुछ कहा और कुछ अनकहा रह गया
दिल युँही ख़्वाहिशों से भरा रह गया

उसने जाते हुए ये भी सोचा नहीं
उसके जाने पे, बाक़ी ही क्या रह गया

'उम्र भर साथ देना था मेरा जिसे
वो गया और मैं देखता रह गया

दश्त में जिसको दरिया समझते हो तुम
पास उसके है जो भी गया, रह गया
'इश्क़ से और उम्मीद होती भी क्या 'इश्क़ में जो फ़ना था फ़ना रह गया

  - Hasan Raqim

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