"है प्यार कितना"
जब उस ने पूछा, है प्यार कितना?
बताया मैं ने हवाओं जितना
या उतना जितने हैं फूल जग में
या शायद उतना हैं रंग जितने
या फिर है उतना है रेत जितनी
या सारी नदियों का सारा पानी,
ये नभ में तारे, ये पेड़ सारे,
ये जितनी डालों पे बैठे पंछी
हैं सारी आँखों में ख़्वाब जितने
हैं जितने राही हैं जितने रस्ते
है जितना भी सब जहान भर में
बहुत ही कम है ये उस की निस्बत
जो प्यार तुम से किया है मैं ने,
अगर मोहब्बत को तोल पाता
तो फिर याकीनन तुम्हें दिखाता,
है प्यार कितना है प्यार कितना
— Hasan Raqim















