
चार थपेड़े पड़े हवा के एक भी दाना नहीं मिला
दिनभर भूखी घूमी चिड़िया लेकिन खाना नहीं मिला
इस दुनिया ने बहुत दिया लेकिन ता'ने भी खूब दिए
एक ये तेरा दर है मालिक जहाँ से ताना नहीं मिला
— Hritik chaurasia
Shers of pollution.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling