पहली मुहब्बत

चलो आज अपनी कहानी सुना दें
छुपा जो भी रक्खा उसे अब बता दें
है ता'ने यूँ खाए सभी के दिलों से
जिए हैं अभी तक बड़ी मुश्किलों से

रहे है यूँ बेचैन क्या ही बताएँ
किसे दें सदाएँ किसे हम बुलाएँ
मिरे घर का कमरा मुझे देखता है
वो जुमला वही आजकल फेंकता है

कि तुम से मुहब्बत मुझे हो गई है
बताओ ए आशिक़ वो लड़की कहीं है?
कि तुम ने जिसे आँखों पर था बिठाया
कि उस के ही सपनों से ख़ुद को सजाया

वही जिस की बाहें थी मुझ पर बनाई
उसी के किनारे ही कुर्सी लगाई
तुम्हीं ने लिखी थी ये नज़्में ये ग़ज़लें
ख़तों को छुपाया कि अब दें कि तब दें

मिरे घर में ऐसे ही क़िस्से भरे हैं
मिरा जीना मुश्किल पे मुश्किल करे हैं
तुम्हीं अब कहो मैं करूँ तो करूँ क्या
कि तुम से ए जानाँ कहूँ तो कहूँ क्या

मेरी जान तुम मेरी हसरत रही हो
मगर तुम भी पहली मुहब्बत नहीं हो

मगर तुम भी पहली मुहब्बत नहीं हो

— Shriyansh Qaabiz

More by Shriyansh Qaabiz

Other nazm from the same pen

See all from Shriyansh Qaabiz →

Heartfelt Depression Shayari

Shers of heartfelt depression.

All Heartfelt Depression Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling