भीड़ थी अपनों की तन्हा था मगर
दूर से ही वो सहारा था मगर
ध्यान होंठों का रखा सिगरेट ने
काम वैसे ये तुम्हारा था मगर
आज जिस दरिया पे इतराते हो तुम
वो कभी पूरा हमारा था मगर
— Irshad Siddique "Shibu"
दूर से ही वो सहारा था मगर
ध्यान होंठों का रखा सिगरेट ने
काम वैसे ये तुम्हारा था मगर
आज जिस दरिया पे इतराते हो तुम
वो कभी पूरा हमारा था मगर
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