ग़ैर हैं बस इस लिए हैं मार करते
अपने होते सीने लगते प्यार करते
चोट खाते यार मुझ को देखते तो
देखती दुनिया जो मेरे यार करते
ज़िंदगी के सातों दिन ग़म के दिए हैं
एक दिन तो कम से कम इतवार करते
दोस्ती यारी से बाहर आते तब तो
हम किसी लड़कीं से जा कर प्यार करते
ख़ानदानी दुश्मनों का हाथ है ये
दोस्त होते पीठ पीछे वार करते
— Irshad Siddique "Shibu"















