ख़ुदाया इश्क़ के ग़म से उबर जाएँरहें ज़िंदा मरे सा हम कि मर जाएँतबाही ही नज़र आए मुझे हर सूकरें क्या फ़ैसला आख़िर किधर जाएँ— Chandan Sharma