
इक ख़्वाब आज कल मुझे रातों में आ रहा
महबूब मेरा गै़र की बातों में आ रहा
मैं किस तरह से यार तेरी पैरवी करुँ
ये किस का हाथ है तिरे हाथों में आ रहा
— jaani Aggarwal taak
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