छाँव बिखरी थी मगर साया नहीं था

ऐसे भी गुज़रेगी ये सोचा नहीं था

हम से वो मिलते रहे काफ़ी दिनों तक
पर हमारा हाल तो पूछा नहीं था

इश्क़ पहले चल रहा था जैसे तैसे
मिलना लेकिन इतना भी महॅंगा नहीं था

मौत पहले भी यहाँ आती थी लेकिन
यूँ अचानक आने का धोका नहीं था

दरिया में पानी था पर हम पी न पाएँ
घूस के बिन जाने का रस्ता नहीं था

सोचा करते थे ख़रीदारी से पहले
धोका देना इतना भी सस्ता नहीं था

ग़म तो था उस से बिछड़ने का मगर शाज़
ख़ुद-कुशी कर लेंगे ये सोचा नहीं था

— Meem Alif Shaz

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