धूप में चलते हुए तुम ने मुझे देखा नहीं
रात दिन ढलते हुए तुम ने मुझे देखा नहीं
हर गली से गुज़रा हूँ मैं हर गली में बैठा हूँ
'इश्क़ में जलते हुए तुम ने मुझे देखा नहीं
मेरे हाथों से शजर को कटते तो देखा मगर
हाथ को मलते हुए तुम ने मुझे देखा नहीं
मेरी शोहरत भी मिरी ख़ुशहाली भी देखी मगर
मिट्टी में गलते हुए तुम ने मुझे देखा नहीं
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