“एक तस्वीर “
एक तस्वीर बैठी है कमरे में
बहुत ख़ामोश है
मानो कोई सदमा लगा हो
चेहरा उदासी में भीगा हुआ
होंटों पर अनकही बातें
आँखों में अधूरे ख़्वाब
ये मुझ से बात नहीं करती
मेरे ग़ुस्से से भी नहीं डरती
शायद मुझे भी तस्वीर होना पड़ेगा
ये जिस्म का लिबास खोना पड़ेगा
वो इसी के इंतिज़ार में लगती है
एक तस्वीर जो मेरे कमरे में बैठी है
— Meem Alif Shaz















