क्या मिला है इस तरह हुशयार होकरआज मेरी राह में दीवार होकरअब कहाँ है ग़ुस्सा तेरा ज़ुल्म तेराअब तो हिलता भी नहीं बीमार होकर— Meem Alif Shaz