न तारीख़ बदली न ही हाल बदला

न बदली अदाऍं न ये साल बदला

मेरा शहर बदला मेरा गाँव बदला
न ही लोग बदले न सुरताल बदला

सड़क भर गई लोग हैं अब ज़ियादा
फ़लक में परिंदों ने क्यूँ हाल बदला

समुंदर किनारा टहलते जिगर हम
दिया था मुझे जो न रूमाल बदला

बहुत प्यार से यार भेजी है तुम को
ख़बरदार जो मख़मली शाॅल बदला

चलो इम्तिहाँ बस करो मान जाओ
न कालिख़ न लिखना न ही काल बदला

— Saurabh Yadav Kaalikhh

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