"फिर से तेरी याद आई"
दिल मेरा चाहता है तेरे क़रीब आऊँ
फिर मैं ये सोचता हु फिर कैसे हार जाऊँ
तुझ को लगा के सीने से साँसों में मैं बसूँ
एक बस तुझी को देखूंँ तेरे क़रीब रहूँ
कितना तड़प रहा हु आओ तुम्हें बताऊँ
कितने ज़माने गुज़रे तुझ से जुदा हुए
तुम भी बदल गए हो शायद ख़ुदा हुए
मैं कैसे काटता हूँ दिन आओ तुम्हें दिखाऊँ
— Kajiimran















