मौसम भी बरसाती है
अंदर बारिश आती है
नन्ही सी इस कुटिया में
झील बना कर लाती है
बस इतना ही काफी है
हर आफ़त टल जाती है
अब भी मेरे सपनों में
पहले वाली आती है
— Aashish kargeti 'Kash'
अंदर बारिश आती है
नन्ही सी इस कुटिया में
झील बना कर लाती है
बस इतना ही काफी है
हर आफ़त टल जाती है
अब भी मेरे सपनों में
पहले वाली आती है
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