ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है
मौत अब ज़िंदगी से प्यारी है
सिर्फ़ तेरा नहीं चुकाना कर्ज़
मुझ पे इक और जिम्मेदारी है
जीतने को ज़रूर खेल रहे
जीत पक्की नहीं हमारी है
ज़िंदगी देख छा गया हूँ मैं
उम्र हल्की मुक़ाम भारी है
— Aashish kargeti 'Kash'
मौत अब ज़िंदगी से प्यारी है
सिर्फ़ तेरा नहीं चुकाना कर्ज़
मुझ पे इक और जिम्मेदारी है
जीतने को ज़रूर खेल रहे
जीत पक्की नहीं हमारी है
ज़िंदगी देख छा गया हूँ मैं
उम्र हल्की मुक़ाम भारी है
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