ख़ुद को यूँं मुब्तिला सा रखना है
तुम से कुछ सिलसिला सा रखना है
तुम को आना नहीं है मिलने पर
दर को अपने खुला सा रखना है
कोई मुश्किल नहीं है तेरा ग़म
दिल को बस हौसला सा रखना है
आ भी जाओ कज़ा से पहले तुम
ऐसे में क्या गिला सा रखना है
यादें तेरी हो मेरे रस्ते पर
अब तो ये क़ाफिला सा रखना है
अब तेरा ग़म छुपाना है हंस कर
अब तो ये मशग़ला सा रखना है
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