ज़िन्दगी हम सफ़र नहीं होती

मौत मंज़िल अगर नहीं होती

सब की क़िस्मत है ख़ाक में मिलना
बात ये बे-असर नहीं होती

वो मुझे छोड़ कर गई वरना
बेबसी मेरा घर नहीं होती

मैं अगर बे-वक़ार होता तो
बात मेरी उधर नहीं होती

हम तेरी याद में नहीं जीते
याद गर चारा-गर नहीं होती

मुझ को जब उस की याद आती है
मुझ को अपनी ख़बर नहीं होती

इश्क़ कामिल कहानियों में है
कोई चाहत अमर नहीं होती

कुछ तो देखा है तुझ में ख़ालिद ने
यूँ ही दिल में ग़दर नहीं होती

— Khalid Lakhnavi

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