अब फ़लक पर वो सितारा न रहा
रौशनी का भी सहारा न रहा
पार दरिया के पहुँच जाते मगर
बाक़ी अब कोई किनारा न रहा
हाथ औरत पे उठाने लगा तो
लड़का वो माँ का दुलारा न रहा
पूछते हैं वो भी तनख़्वाह मेरी
अब मुहब्बत में गुज़ारा न रहा
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