अपनी अदाएँ वो भी दिखाने पे आ गई
यानी कि जान अपनी निशाने पे आ गई
दो-चार रोज़ तो हमें अच्छा लगा मगर
खा कर फ़रेब अक़्ल ठिकाने पे आ गई
मैं आज़माता ही न मुहब्बत तेरी मगर
इक रोज़ तू मुझे ही सताने पे आ गई
पहले पहल तो ख़ूब हुईं बातें वादों की
करके मगर वफ़ा वो जताने पे आ गई
कोशिश के बाद भी न मेरी वो हुई मगर
हर दाँव खेला जब भी निभाने पे आ गई
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