पहले तो सब कुछ अच्छा लगता है
आख़िर में आशिक़ कच्चा लगता है
इतनी शिद्दत से उसको चाहा है
उसका हर वा'दा सच्चा लगता है
ज़िम्मेदारी जिस पर अब घर की है
माँ को तो अब भी बच्चा लगता है
रेखाओं में है तेरा नक़्श-ए-पा
हाथों में तेरा नक़्शा लगता है
हम को है तेरी चाहत और तेरा
ग़ैरों से रिश्ता गहरा लगता है
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