कभी यहाँ से गए, तो कभी वहाँ से गए
उन से बिछड़ के हम
पता नहीं कहाँ कहाँ से गए
उन के सिवा जो निकले
हर रास्ते हम गुम्र
हाँ से गए
मुलाक़ाते होती रहती थी
हमारी ज़ीन राहों पर
फिर कभी ना हम
भूल कर भी वहाँ से गए
एक बार तो बता देते
वजह क्या थी रूठने की
ख़ामोश होकर ना जाने क्यूँ
किस वज
हाँ से गए
मोहब्बत में कर बैठे थे
जगह जो उन के दिलों जहाँ में
ना चाहते हुए भी निकाले
उन के दिलों जहाँ से गए
हम मोहब्बत में
उन के कुछ ऐसा भटके
कभी यहाँ से गए
तो कभी वहाँ से गए
— Kohar















